Friday, 18 March 2016

चकबंदी कर्मचारियों की मांगें पूरी, हड़ताल स्थगित- अजय श्रीवास्तव अध्य्क्ष।

जौनपुर। एक सप्ताह के अंदर विभाग के कर्मचारियों को ए सी पी का लाभ दिए जाने के आश्वासन के बाद चकबन्दी विभाग के कर्मचारियों की 18 मार्च से प्रस्तावित हड़ताल स्थगित कर दी गयी है। शुक्रवार को बन्दोबस्त अधिकारी चकबंदी कार्यालय पर आयोजित विभाग के समस्त कर्मचारी संगठनो के पदाधिकारियो और सक्रिय सदस्यों की उपस्थिति में चकबंदी कर्मियों को संबोधित करते हुये चकबंदी कर्ता संघ के अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव का कहना था कि अधिकारीयों के साथ हुयी सम्मानजनक वार्ता और एक हफ़्ते में मांग पूरी होने के आश्वासन के बाद प्रस्तावित हड़ताल स्थगित की जाती है। श्री श्रीवास्तव ने समस्त पदाधिकारियो और कर्मचारी साथियों का शुक्रिया अदा किया। इस अवसर पर शिवशंकर यादव, अरविन्द सिंह, अरुण सिंह,संतोष अस्थाना, लक्षमण सिंह, शजर हसन, नज़रुल इस्लाम कड़े बहादुर, राम आसरे यादव आदि रहे।

Friday, 11 March 2016

उर्दू अध्यापक कॉउंसलिंग में धांधली, भ्रस्टाचार के आरोप। जिलाधिकारी को दिया पत्रक।

जौनपुर। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद् विभाग द्वारा 3500 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति/चयन हेतु द्वितीय कॉउंसलिंग में विभाग द्वारा धांधली, मनमानी और भ्रष्टाचार का आरोप अभ्यर्थियों ने लगाया है। शुक्रवार को आक्रोशित अभ्यर्थियों ने जिलाधिकारी को संबोधित पत्रक उपजिलाधिकारी रिंकी जायसवाल को सौंपा। अभ्यर्थियों ने जिलाधिकारी से प्रकरण की जाँच कराने और कॉउंसलिंग के दिन उपस्थित वास्तविक कुल 35 अभ्यर्थियों में से ही मेरिट की वरीयता के क्रम में निर्धारित पदों के सापेक्ष अनंतिम सूची तैयार कराने की मांग की है ताकि हक़्तलफी न हो और न्याय हो सके। सहायक उर्दू अध्यापक कॉउंसलिग के अभ्यर्थियों का स्पष्ट शब्दों में कहना था कि द्धितीय कॉउंसलिंग के दिन 5 मार्च को सुबह 10 बजे से सांय 5 बजे तक सामान्य वर्ग के 25, ओबीसी वर्ग के 9 तथा एक विकलांग अभ्यर्थी ने यानि कुल 35 अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। किन्तु विश्वस्त सूत्रों से पता चला है की बाद में बेसिक शिक्षा कार्यालय जौनपुर द्वारा पैसा लेकर कई लोगों के मूल  प्रमाणपत्र लेकर उन्हें शामिल करने की साज़िश चल रही है। जो वास्तविक अभ्यर्थियों के साथ धोखा और अन्याय है। जिलाधिकारी से जाँच और न्याय की मांग की गयी है। पत्रक सौपने वालों में ज़किया मेंहदी ज़िला अध्य्क्ष मुअल्लिम संघ, अयाज़ अहमद, तसनीम हैदर खान,मोहम्मद अख्तर, आलम आरा, शब्बी बानो, राश्की बानो, मुहम्मद हलीम, सबीना परवीन, उम्मे ज़हरा आदि रहे।

न ऐसा खतीब देखा और न ऐसी खेताबत। खतीबे-अकबर के चालीसवें की मजलिस 3 अप्रैल को।

हिंदुस्तान की अज़ादारी पूरी दुनिया में अपना मुक़ाम रखती है। और हिंदुस्तान में लखनऊ तो हमेशा से अज़ादारी का मरकज़ रहा। इस सर ज़मीन ने एक से बढ़कर एक आलिम,ज़ाकिर और खतीब पैदा किये जिन्होंने पूरी दुनिया में अपना मुल्क का और इस सरज़मीन का नाम रौशन किया। इस फेहरिस्त में मरहूम मिर्ज़ा मोहम्मद अतहर का नाम सबसे ऊपर है। जिनकी खेताबत और उनके जुदा अंदाज़ की पूरी दुनिया क़ायल है। इल्म का खज़ाना, बेहतरीन नायाब मिसालें और बा आसानी अपनी बात लोगों तक पहुचाने के फन का जवाब नहीं। मुम्बई की मुग़ल मस्जिद में एक ही मेम्बर से लगातार 50 साल से ज़्यादा अशरे को ख़िताब करने का रिकॉर्ड भी है और ये सलाहियत भी उन्ही को हासिल थी। और चाहने वाले ऐसे की हर क़ौमों मिल्लत के लोग उन्हें सुनने आते थे। उनके चालीसवें की मजलिस 3 अप्रैल बरोज़ इतवार 10 बजे दिन बड़े इमामबाड़े में होगी जिसमे मुल्क के हर कोने से मौला के अज़ादार पहुँच रहे हैं। जो खुद अपने आप में एक तारीख़ होगी। सही है की न ऐसा खतीब देखा न ऐसी खेताबत।

Sunday, 6 March 2016

जौनपुर की ऐतिहासिक शाही अटाला मस्जिद के सुंदरीकरण का कार्य जारी।

जौनपुर। ज़िला प्रशासन जहाँ पूरे शहर को सुंदर बनाने, अतिक्रमण हटाने,सड़को को चौड़ा करने, चौराहों को सजाने और पार्क आदि का निर्माण तो करा ही रहा है साथ ही साथ शिराज़-ए-हिन्द जौनपुर की ऐतिहासिक धरोहरों को भी अतिक्रमण मुक्त कराने, संरक्षा,सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें चारों तरफ से ऐसा इंतज़ाम किया जा रहा है जिससे इन तारीख़ी इमारतों की ख़ूबसूरती में इज़ाफ़ा हो सके। इसी क्रम में सबसे पहले अटाला मस्जिद की पश्चिमी दीवार से सटकर बनी अतिक्रमित दुकानों रिक्शा गैरेज आदि का ध्वस्तीकरण का कार्य हुआ। अब उस दीवार के ठीक बग़ल खूबसूरत चबूतरे का निर्माण हो रहा है और बची ही सारी जगह पर ख़ूबसूरत पत्थर बिछाये जायेंगे। सुरक्षा भी और सुंदरीकरण भी। तो वाक़ई अब शहर जौनपुर में चार चाँद लगने वाला है। जो जिलाधिकारी जौनपुर भानुचंद गोस्वामी के विशेष् प्रयास का नतीजा है।

पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने जौनपुर में पलटी राजनैतिक बाज़ी।

शासन-सत्ता की हनक के बावजूद सपा को भारी अंतर से हराने और बसपा को ऐतिहासिक जीत दिलाने का श्रेय सिर्फ और सिर्फ पूर्व सांसद धनंजय सिंह को जाता है। ये उनकी ज़बरदस्त व्यूह रचना, अनोखी रणनीति और अत्यंत दूरगामी सोच का नतीजा है।नगर पालिका चुनाव हो या पंचायत निर्वाचन सभी में प्रत्याशियों को खड़ा करना, समर्थन करना आदि वो अपनी रणनीति बरसों पहले बनाकर अमल करते हैं।अपने प्रतिद्वंदियों पर गहरी नज़र, उनकी कमी, अच्छाई का तुलनात्मक अध्धयन और फिर पूरे तन मन धन और मनोयोग से अपने को रण में झोंक देना उनकी विशेष्ता है। अपने राजनैतिक विरोधियों की हर चाल पर नज़र रखना और स्वंय गुप्त रणनीति बनाकर अमल करना उनकी कामयाबी की वजह रही है। वर्तमान स्थानीय निकाय एमएलसी चुनाव में सपा को पटखनी देकर अपने अत्यंत क़रीबी प्रिंसू को जीताकर उन्होंने ज़िले में अपनी राजनैतिक मज़बूती का एहसास कराया है। जिसका असर बेशक आगामी विधान सभा चुनाव में साफ दिखाई देगा। 

Saturday, 5 March 2016

सपा को करारा झटका बृजेश सिंह प्रिंसु बसपा 765 वोट से विजयी।

स्थानीय निकाय एमएलसी चुनाव में जौनपुर से बसपा प्रत्याशी ब्रजेश सिंह प्रिंसू ने अपने निकटतम सपा के लल्लन प्रसाद यादव को765 मतों से पराजित किया। बेशक इस जीत का श्रेय पूर्व सांसद धनजंय सिंह को जाता है। उनकी बाक़ायदा तैयारी और सतत प्रयास का नतीजा है ये और सपा की नाकामी भी साफ झलकती है। निश्चित रूप से ये ऐतिहासिक सफलता है।प्रिंसू को कुल 1743 लल्लन सपा को 978 और सतीश सिंह बीजेपी को 230 मत मिले।

आज़ादी की नई इबारत लिखने को बेताब....है हक़ हमारा आज़ादी

है हक़ हमारा आज़ादी, हम लेकर रहेंगे आज़ादी, आज़ादी,आज़ादी आज़ादी जी हाँ ज़मानत पर रिहा होने के बाद jnu छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया ने कैंपस में उपस्थित विशाल जनसमूह को 50 मिनट तक जिस अंदाज़ में संबोधित किया उसमे न डर था न ख़ौफ़ न हड़बड़ाहट न बौखलाहट बल्कि गज़ब का आत्म विश्वास, शासन-सत्ता और व्यवस्था के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त आक्रोश पर भारत के संविधान क़ानून और न्याय पर पूरा भरोसा। इस पूरे भाषण का मुल्क पर दो असर हुआ एक तो भाजपा,मोदी,संघ आदि के समर्थक एक विशेष् विचारधारा के पोषक लोगों को बड़ा नागवार गुज़रा और उन्होंने अपने तर्क-कुतर्क से इसे ग़लत साबित करने की हर कोशिश की गयी। दूसरे वो लोग जिनकी तादाद बहुत ज़्यादा उन्हें इस आज़ादी के नारे में अपनी गुलामी साफ नज़र आयी और आज़ादी अपना अधिकार भी समझ आया और कन्हैया की तक़रीर में एक कशिश, उमंग, विश्वास और अपनी-अपनी गुलामियों से आज़ाद होने की मज़बूत उम्मीद भी नज़र आयी। और समझ आया की वो जिसे हम बरसों से अपनी समस्या समझते थे वो अब ग़ुलामी (दासता)में बदल चुकी है। और समस्या का तो निदान हो सकता है। पर ग़ुलामी से मुक्ति के लिए तो आज़ादी का झंडा बुलंद ही करना पड़ता है। 15 अगस्त 1947 के बाद ऐसा लगता था कि अब इस मुल्क में न तो ग़ुलामी है न ही आज़ादी की कोई ज़रुरत। पर कन्हैया ने आज़ादी और क्रांति की नई इबारत लिखना शुरू किया है। और लोगों को उनकी गुलामी का एहसास कराया और आज़ादी का जज़्बा पैदा किया है। इस नौजवान ने कोई सपना नहीं बेचा बल्कि जो ग़ुलाम बनाये रखना चाहते है गुलामी पसंद और उनके अन्धभक्त उनकी चूले हिलायी हैं और आम भारतीय में नया जोश। आज़ादी का नारा मात्र बड़ा जोश पैदा करता है और लड़ने जीतने की ताक़त भी देता है। अब देखते हैं आगे ...... आज़ादी आज़ादी आज़ादी जयहिंद।