Sunday, 19 March 2017

पूर्व क्रिकेटर मोहसिन रज़ा ने ली योगी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री की शपथ।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नवनिर्वाचित योगी सरकार के मंत्रिमंडल के एकमात्र मुस्लिम चेहरे के रूप में पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी के प्रवक्ता मोहसिन रज़ा ने बतौर राज्यमंत्री शपथ ली। रणजी ट्रॉफी में यूपी का प्रतिनिधित्व कर चुके मोहसिन रज़ा ने लखनऊ से शिक्षा भी ग्रहण की है। योगी मंत्रिमंडल के एकमात्र मुस्लिम सदस्य होने के नाते श्री रज़ा चर्चा में हैं। और उनके समर्थक प्रदेश भर में मिठाई बाटने और ख़ुशी मनाने में व्यस्त हैं।

Sunday, 12 March 2017

मुख्य कोषाधिकारी जौनपुर राकेश सिंह ने दी होली पर्व की बधाई।

जौनपुर। मुख्य कोषाधिकारी जौनपुर राकेश सिंह ने समस्त अधिकारी-कर्मचारी और जनपदवासियों को होली पर्व की शुभकामनायें और बधाई दी है। हमसे बात करते हुये ज़िले के लोकप्रिय और कर्मठ अधिकारी राकेश सिंह ने सभी को रंगों के त्यौहार होली की हार्दिक बधाई देते हुये कहा की समस्त अधिकारीयों- कर्मचारियों के लिए इस वर्ष की होली ज़्यादा खुशियों भरी इसलिए है कि होली के ठीक पहले सभी ने पूरी ज़िम्मेदारी और परिश्रम से निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य को कामयाबी के साथ संपन्न कराया।

ईवीएम् मशीन से पहले अपनी कार्यशैली का पुनरावलोकन ज़्यादा अहम् है।

यूपी के विधानसभा के चुनाव में भाजपा के ऐतिहासिक बहुमत प्राप्त करने के फ़ौरन बाद बसपा सुप्रीमो मायावती जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ईवीएम मशीन की विश्वसनीयता पर मज़बूती के साथ गंभीर सवाल खड़े किये। इसमें दो राय नहीं है कि इससे पहले भी देश के कई नेताओं ने बाक़ायदा इस पर सवाल खड़े किये हैं। और ये बात भी सच है कि अमेरिका जैसे विकसित देश भी इसे छोड़ चुके हैं। तो बेशक इस गंभीर सवाल पर देश में विचार-विमर्श होना चाहिए और नतीजे पर भी पहुचना होगा। क्योंकि जो लोकतंत्र को ख़तरा पैदा करे ऐसी व्यवस्था बनाये रखना मुनासिब नहीं। पर इससे कम अहम् ये नहीं कि बसपा को अपनी पिछले कई वर्षो की कार्यशैली का पुनरावलोकन और समीक्षा गंभीरता पूर्वक करना होगा। सन् 2014 के संसदीय चुनाव में जब प्रदेश की स्थापित पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली अति पिछड़ा साथ छोड़ गया तो लगभग तीन साल के अंतराल में 2017 के चुनाव आने तक ज़िले-ज़िले जाकर कितने कार्यकर्त्ता सम्मलेन किये गए। कार्यकर्ताओं से संवाद मशविरा हुआ ही नहीं और न ही लगातार छोड़ कर जा रहे अतिपिछड़ों के जाने की वजह और उन्हें जोड़ने पर कितना चिंतन मंथन और प्रयास किया गया। तो नतीजा शून्य ही निकलेगा इतना ही नहीं अनुसूचित जाति के लोगों को भी वोटबैंक से ज़्यादा की तरजीह नहीं दी गयी। ऐसे में लोकतंत्र में तानाशाही रवैये से किसी को बहुत दिन बांधे नहीं रखा जा सकता है। जहाँ मान्यवर कांशीराम ने दलित समुदाय के अंदर एक नई जागरूकता पैदा की वहीँ अतिपिछड़े वर्ग की ढेर सारी जातियां जिनकी कोई राजनैतिक पहचान नहीं थी उन्हें खड़ा किया जगाया और जोड़ने का काम किया पर वक़्त के साथ ये सारे लोग धीरे-धीरे साथ छोड़ते गए। टिकटों की तिजारत के इलज़ाम लगते रहे और आज तो अस्तित्व का संकट है। और इन्ही छोड़ कर गए लोगों को मोदी और अमितशाह ने बड़ी ही राजनैतिक चतुराई से अपने साथ जोड़ा और सपा के सिर्फ एक बिरादरी के सत्ता के लाभ लेने और दुरुपयोग ख़िलाफ़ आमजन के ग़ुस्से को अपने पक्ष में इतनी कामयाबी के साथ ले गए कि केंद्र सरकार की विफलताओं की चर्चा न जाने कहाँ गम हो गयी। इतना ही नहीं सपा-बसपा कांग्रेस ने इतना मुसलमान-मुसलमान किया इनके वोट अपने पक्ष में लेने के लिए। उतना बीजेपी का रास्ता और आसान हो गया। बहरहाल सपा-बसपा अब से नहीं जागे तो इनके वजूद क़ायम रहने में भी मुझे शक है। सिर्फ प्रेस वार्ता रैली से काम नहीं चलेगा आमजन और आम कार्यकर्ता से राबता क़ायम करना होगा विशेष् रूप से मायावती जी और बसपा को।

Monday, 20 February 2017

चुनाव 2017 पोलिंग पार्टियों के स्टेशनरी पैकेट युद्ध स्तर पर हो रहे तैयार।

जौनपुर। विधानसभा सामान्य निर्वाचन 2017 में जौनपुर की 9 विधानसभा की सभी पोलिंग पार्टियों को दिए जाने वाले स्टेशनरी पैकेट को तैयार करने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। हमसे बात करते हुये चकबंदी कर्ता संघ के ज़िला अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बताया की सहायक स्टेशनरी  प्रभारी रामकुमार गुप्ता(चकबंदी अधिकारी) के कुशल निर्देशन में विभाग के दर्जनों अधिकारी/कर्मचारी कड़ी मेहनत करके पूरी लगन के साथ पैकेट को तैयार कर रहे हैं। हमारे संवाददाता जब नवनिर्मित निर्वाचन कार्यालय पहुंचे तो पूरी टीम को कार्य सम्पादित करते हुये पाया। इस कार्य को ससमय सम्पन्न कराने में सहायक चकबंदी अधिकारी राजनाथ यादव, प्रताप बहादुर, विजय शंकर श्रीवास्तव, चकबंदी कर्ता प्रकाशचंद आदि सक्रिय हैं।

Wednesday, 15 February 2017

पूर्वांचल की राजनीति का युवा चेहरा अब्बास अंसारी के बढ़ते क़दम।

मऊ जनपद के घोसी विधानसभा से बसपा के उम्मीदवार अब्बास अंसारी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। राजनीति और समाज सेवा पुश्तों से उनके ख़ून में शामिल है। जी हाँ मऊ के चर्चित विधायक मुख़्तार अंसारी के बेटे और पूर्व सांसद अफ़ज़ाल अंसारी के भतीजे अब्बास अंसारी ने ख़ानदानी परम्परा को आगे बढ़ाते हुये, समाजसेवा के मज़बूत इरादे के साथ सियासत की दुनिया में बाक़ायदा क़दम रखते हुये अपने 25 वें जनम दिन के दूसरे दिन घोसी विधान सभा से परचा दाख़िल किया। यूं तो राष्ट्रीय चैंपियन रहते हुये मुल्क को गोल्ड मेडल दिलाने वाले अब्बास अंसारी के हौसले बुलंद हैं और अभी भी देश के लिए और मैडल लाने की ख़्वाहिश भी है। पर सियासत की दुनिया में भी उनकी कम वक़्त जो साख, पहचान और लोकप्रियता है वो उनके सुनहरे भविष्य का साफ संकेत है। पूरे पूर्वांचल में आजमगढ़, जौनपुर, ग़ाज़ीपुर, मऊ सहित कई ज़िलों के प्रत्याशी, कार्यकर्त्ता और पार्टी के लोगों की लगातार और पुरज़ोर ख़्वाहिश है कि अगर अब्बास की एक मीटिंग हमारे विधानसभा हल्के में हो जाये तो मंज़र बदल जायेगा और हमारी जीत आसान हो जाय। और निश्चित रूप से इस चुनाव में अब्बास अंसारी ऐसे युवा नेता के रूप में ज़रूर स्थापित होंगे जो लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करेगा। युवाओं के चहेते अब्बास से हर कोई मिलना चाहता है, उनसे जुड़ना चाहता है। ये तो महज़ ज़बरदस्त आग़ाज़ है। अंसारी परिवार के इस युवा से लोगों की बड़ी उम्मीदें वाबस्ता हैं। जिसे आने वाले वक़्त में अब्बास को पूरा भी करना होगा।

Monday, 16 January 2017

हार है या है जीत, जंग थी या था ड्रामा।

चुनाव आयोग का फैसला आ चुका है। अब सपा और साईकिल दोनों अखिलेश की है ये ऐलान बाक़ायदा हो चुका है। आने वाले चुनाव में गठबंधन सहित सीटों का चुनाव एक-दो दिन में होने की ख़बर है। सबकुछ पहले से तय था बस घोषणा होना बाक़ी है। पर इस पूरे प्रकरण या यूं कहें की समाजवादी पार्टी में उठा विवाद जिसने संग्राम का रूप लिया और आख़िरकार ये विवाद चुनाव आयोग तक पहुंचा था। और इस पूरे मामले में राजनैतिक पंडित, सियासत के जानकार और मीडिया से जुड़े लोग अक्सर भ्रमित रहे की ये वास्तव में जंग थी या बाक़ायदा रचा गया सियासी ड्रामा जिसका मक़सद सिर्फ और सिर्फ अखिलेश को बड़े ही ड्रामाई अंदाज़ से सपा की कमान सौपना, अखिलेश के नेतृत्व को स्थापित करना, अपनी सियासी विरासत को पूर्णतया अखिलेश को सौपना तो नहीं। महीनो तक मीडिया और सभी का ध्यान भटकाना या आकर्षित करना था। ये मुलायम सिंह की हार है या जीत, ये जंग थी या ड्रामा कुछ साफ हो चुका है और कुछ साफ होना बाक़ी है। पर असल नतीजा तो प्रदेश की जनता सुनाएगी।

अखिलेश को मिली साईकिल, मुलायम सिंह यादव हुये पैदल।

आख़िरकार सियासी जंग में बाप बेटे से हार गया। चुनाव आयोग ने अखिलेश यादव को साईकिल चुनाव चिन्ह भी दिया और उनके नेतृत्व वाले दल को ही असली समाजवादी पार्टी माना है।मुलायम सिंह ने जिस समाजवादी पार्टी को बनाया उसे इस मुक़ाम तक पहुँचाया और सन् 2012 के विधानसभा चुनाव में बहुमत के बाद उन्हें ढेर सारे लोगों की भावनाओं के विपरीत सत्ता की बागडोर सौंप दी। आज उसी बेटे से छिड़ी सियासी जंग हार गए। उनकी आँखों के सामने उनके अपने लोग ख़ुद उनके बेटे ने उनका साथ छोड़ा और अब पार्टी पर हक़ किसका होगा ये फैसला भी चुनाव आयोग ने मुलायम सिंह के ख़िलाफ़ सुना दिया। अब क्या किसी दूसरी पार्टी को अपना कर मुलायम सिंह बेटे को चुनाव में भी चुनौती देंगे ऐसी चर्चा है। देखिये हुकूमत, सियासत जो न करा दे। तो बेशक ये इस जंग का अंत नहीं, पिक्चर अभी बाक़ी है। देखते चलिए किस्सा कुर्सी का। जंग बाप-बेटे की।