Monday, 20 February 2017

चुनाव 2017 पोलिंग पार्टियों के स्टेशनरी पैकेट युद्ध स्तर पर हो रहे तैयार।

जौनपुर। विधानसभा सामान्य निर्वाचन 2017 में जौनपुर की 9 विधानसभा की सभी पोलिंग पार्टियों को दिए जाने वाले स्टेशनरी पैकेट को तैयार करने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। हमसे बात करते हुये चकबंदी कर्ता संघ के ज़िला अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बताया की सहायक स्टेशनरी  प्रभारी रामकुमार गुप्ता(चकबंदी अधिकारी) के कुशल निर्देशन में विभाग के दर्जनों अधिकारी/कर्मचारी कड़ी मेहनत करके पूरी लगन के साथ पैकेट को तैयार कर रहे हैं। हमारे संवाददाता जब नवनिर्मित निर्वाचन कार्यालय पहुंचे तो पूरी टीम को कार्य सम्पादित करते हुये पाया। इस कार्य को ससमय सम्पन्न कराने में सहायक चकबंदी अधिकारी राजनाथ यादव, प्रताप बहादुर, विजय शंकर श्रीवास्तव, चकबंदी कर्ता प्रकाशचंद आदि सक्रिय हैं।

Wednesday, 15 February 2017

पूर्वांचल की राजनीति का युवा चेहरा अब्बास अंसारी के बढ़ते क़दम।

मऊ जनपद के घोसी विधानसभा से बसपा के उम्मीदवार अब्बास अंसारी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। राजनीति और समाज सेवा पुश्तों से उनके ख़ून में शामिल है। जी हाँ मऊ के चर्चित विधायक मुख़्तार अंसारी के बेटे और पूर्व सांसद अफ़ज़ाल अंसारी के भतीजे अब्बास अंसारी ने ख़ानदानी परम्परा को आगे बढ़ाते हुये, समाजसेवा के मज़बूत इरादे के साथ सियासत की दुनिया में बाक़ायदा क़दम रखते हुये अपने 25 वें जनम दिन के दूसरे दिन घोसी विधान सभा से परचा दाख़िल किया। यूं तो राष्ट्रीय चैंपियन रहते हुये मुल्क को गोल्ड मेडल दिलाने वाले अब्बास अंसारी के हौसले बुलंद हैं और अभी भी देश के लिए और मैडल लाने की ख़्वाहिश भी है। पर सियासत की दुनिया में भी उनकी कम वक़्त जो साख, पहचान और लोकप्रियता है वो उनके सुनहरे भविष्य का साफ संकेत है। पूरे पूर्वांचल में आजमगढ़, जौनपुर, ग़ाज़ीपुर, मऊ सहित कई ज़िलों के प्रत्याशी, कार्यकर्त्ता और पार्टी के लोगों की लगातार और पुरज़ोर ख़्वाहिश है कि अगर अब्बास की एक मीटिंग हमारे विधानसभा हल्के में हो जाये तो मंज़र बदल जायेगा और हमारी जीत आसान हो जाय। और निश्चित रूप से इस चुनाव में अब्बास अंसारी ऐसे युवा नेता के रूप में ज़रूर स्थापित होंगे जो लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करेगा। युवाओं के चहेते अब्बास से हर कोई मिलना चाहता है, उनसे जुड़ना चाहता है। ये तो महज़ ज़बरदस्त आग़ाज़ है। अंसारी परिवार के इस युवा से लोगों की बड़ी उम्मीदें वाबस्ता हैं। जिसे आने वाले वक़्त में अब्बास को पूरा भी करना होगा।

Monday, 16 January 2017

हार है या है जीत, जंग थी या था ड्रामा।

चुनाव आयोग का फैसला आ चुका है। अब सपा और साईकिल दोनों अखिलेश की है ये ऐलान बाक़ायदा हो चुका है। आने वाले चुनाव में गठबंधन सहित सीटों का चुनाव एक-दो दिन में होने की ख़बर है। सबकुछ पहले से तय था बस घोषणा होना बाक़ी है। पर इस पूरे प्रकरण या यूं कहें की समाजवादी पार्टी में उठा विवाद जिसने संग्राम का रूप लिया और आख़िरकार ये विवाद चुनाव आयोग तक पहुंचा था। और इस पूरे मामले में राजनैतिक पंडित, सियासत के जानकार और मीडिया से जुड़े लोग अक्सर भ्रमित रहे की ये वास्तव में जंग थी या बाक़ायदा रचा गया सियासी ड्रामा जिसका मक़सद सिर्फ और सिर्फ अखिलेश को बड़े ही ड्रामाई अंदाज़ से सपा की कमान सौपना, अखिलेश के नेतृत्व को स्थापित करना, अपनी सियासी विरासत को पूर्णतया अखिलेश को सौपना तो नहीं। महीनो तक मीडिया और सभी का ध्यान भटकाना या आकर्षित करना था। ये मुलायम सिंह की हार है या जीत, ये जंग थी या ड्रामा कुछ साफ हो चुका है और कुछ साफ होना बाक़ी है। पर असल नतीजा तो प्रदेश की जनता सुनाएगी।

अखिलेश को मिली साईकिल, मुलायम सिंह यादव हुये पैदल।

आख़िरकार सियासी जंग में बाप बेटे से हार गया। चुनाव आयोग ने अखिलेश यादव को साईकिल चुनाव चिन्ह भी दिया और उनके नेतृत्व वाले दल को ही असली समाजवादी पार्टी माना है।मुलायम सिंह ने जिस समाजवादी पार्टी को बनाया उसे इस मुक़ाम तक पहुँचाया और सन् 2012 के विधानसभा चुनाव में बहुमत के बाद उन्हें ढेर सारे लोगों की भावनाओं के विपरीत सत्ता की बागडोर सौंप दी। आज उसी बेटे से छिड़ी सियासी जंग हार गए। उनकी आँखों के सामने उनके अपने लोग ख़ुद उनके बेटे ने उनका साथ छोड़ा और अब पार्टी पर हक़ किसका होगा ये फैसला भी चुनाव आयोग ने मुलायम सिंह के ख़िलाफ़ सुना दिया। अब क्या किसी दूसरी पार्टी को अपना कर मुलायम सिंह बेटे को चुनाव में भी चुनौती देंगे ऐसी चर्चा है। देखिये हुकूमत, सियासत जो न करा दे। तो बेशक ये इस जंग का अंत नहीं, पिक्चर अभी बाक़ी है। देखते चलिए किस्सा कुर्सी का। जंग बाप-बेटे की।

Wednesday, 28 December 2016

सपा प्रत्याशी की अनोखी पहल समाजवादी अलाव, ठंडक में गर्मी का एहसास।

जौनपुर। शीत-लहर के इस दौर में जब ठिठुरन के चलते लोग घरों से बाहर निकलना पसंद नहीं करते। ऐसे वक़्त में जौनपुर सदर विधानसभा के अधिकृत प्रत्याशी जावेद सिद्दीकी ने एक अनोखी पहल की है, जिसका नाम है (समाजवादी अलाव) जी हाँ हर रोज़ एक गाड़ी जिसपर समाजवादी अलाव लिखा होता है निकलती है जिसपर लकड़ी लदी होती है। और मिटटी के तैल का गैलन और माचिस लिए ड्राईवर और एक अन्य व्यक्ति शहर के कोई 25-30 चौराहों-तिराहों और मुख्य स्थानों पर जलाते हैं। इतना ही नहीं ड्राईवर और उस कर्मी को ये निर्देश भी प्राप्त है कि वो चिन्हित स्थान के अलावा अगर कहीं ये देखे की लोगों ने अपने से अलाव की व्यवस्था की है तो वहां भी रूककर लकड़ियाँ ज़रूर गिरा दें। तो है न ये अनोखी व्यवस्था और अनोखी पहल। सियासत अपनी जगह, जीत हार अलग चीज़, लेकिन जावेद सिद्दीकी के इंसानी जज़्बे और इस प्रयास को सलाम जो इस ठण्ड में बेशक आमजन को गर्मी का एहसास और राहत पहुंचा रहा है।

Sunday, 25 December 2016

समाजवादी पार्टी मे टिकट बटवारे को लेकर मचा घमासान।

लखनऊ। कुछ दिनों से ऐसा लगने लगा था कि सपा में सब ठीक है और पार्टी एकजुट होकर विधानसभा चुनाव लड़ेगी। लेकिन ये सच नहीं है, आज इसके साफ संकेत मिल गए जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुल 403 उम्मीदवारों की सूची मुलायम सिंह यादव को भेजी जबकि प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव पहले ही 175 उम्मीदवारों की लिस्ट फाइनल कर चुके हैं। मामला इतने पर शांत नहीं हुआ ।फ़ौरन जवाबी कारवाई में शिवपाल यादव ने ट्वीट कर कहा की पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उम्मीदवारों का चयन जीत के आधार पर होगा। तो कुल मिलाकर सपा में घमासान के स्पष्ट संकेत हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी एकजुट रह पायेगी इसमें संदेह है। इस प्रकार प्रदेश की राजनीति में हर रोज़ नए समीकरण बन बिगड़ रहे हैं ऐसे में कोई भविष्यवाणी करना आसान नहीं है। और सपा की मुश्किल ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही है जो पार्टी के लिए शुभ संकेत तो नहीं है।

Monday, 19 December 2016

बदले हुये, सधे और आक्रामक तेवर में नज़र आये राहुल गांधी जौनपुर में।

जौनपुर। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज यूपी के जौनपुर में बी आर पी कॉलेज के मैदान में जनाक्रोश रैली में जनता से मुख़ातिब थे। रैली में उमड़े विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुये आज उन्होंने विरोधियों को करारा जवाब दिया। बड़े ही सधे अंदाज़ में आक्रामक तेवर के साथ नोट बंदी की खामियों को बड़े ही सिलसिले वॉर ढंग से प्रस्तुत करने, प्रधानमंत्री मोदी के जनविरोधी रुख़ को बताने और खुद को आमजन के साथ जोड़ने में वो ज़बरदस्त कामयाब रहे। नोट बंदी को कभी दूसरे महायुद्ध के अग्नि वर्षक बम से मिसाल दी तो कभी 15 लाख हर अकाउंट में न पंहुचा पाने को याद दिलाया तो कभी विदेशों में जमा काले धन की वापसी न होने और काले कुबेरों के नाम न उजागर करने की बात उठाई। राहुल गांधी ने 99 प्रतिशत आम लोगों गरीबों ,मज़दूरों, किसानो को नोट बंदी से होने वाली परेशानी और 1 प्रतिशत धनाढ्य लोगों को आसानी पहुचाने की सरकार की मंशा को उजागर किया। उन्होंने कैशलेस इकॉनोमी के सरकार के फैसले की बखिया उधेड़ी तथा इसे भारतीय समाज पर थोपने का विरोध किया। श्री गांधी ने नोटबंदी के फैसले से गरीबों के पैसे से अमीरों के क़र्ज़ माफ़ी को भी जनता को बख़ूबी बताया। नोटबंदी के फैसले के पहले भाजपा के विभिन्न प्रान्त में खरीदी गयी ज़मीन के तथ्य भी लोगों को बताये। राहुल ने कहा काला धन, रियल स्टेट, विदेश, गोल्ड आदि में है उसपर हाथ न डाल कर कैश पर हाथ डालकर गरीबों के खून चूसने का काम हुआ है। बहरहाल इस जौनपुर की इस विशाल रैली में राहुल खुद को आमजन के साथ जोड़ने, सरकार पर बाक़ायदा हमलावर रहने और सरकार की नीति को जनविरोधी बताने और धनकुबेरों का हितैषी बताने में कामयाब रहे। भीड़ से गदगद राहुल गांधी ने स्थानीय विधायक नदीम जावेद की जमकर तारीफ की। पूर्वांचल की इस कामयाब रैली में राहुल के अंदाज़ से कहा जा सकता है कि बदले-बदले से मेरे सरकार नज़र आते हैं और ये जनाक्रोश रैली बेशक कांग्रेस के लिये एक बेहतरीन आग़ाज़ है।