उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आंदोलन की पहचान, जुझारू नेता और प्रदेश के कर्मचारी की एक मात्र आस और उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह को वाराणसी सिगरा में हुये सम्मेलन में अध्य्क्ष चुना गया। 19 व् 20 फरवरी को पी एम मोदी के वाराणसी में कर्मचारियों ने हुंकार भरी। केरल, बिहार,तमिलनाडु, मणिपुर,पंजाब,आंध्र प्रदेश, हरियाणा,जम्मू कश्मीर,त्रिपुरा के प्रतिनिधियों के बीच इस सम्मेलन में पारित प्रस्ताव के अनुसार 11 मार्च को केंद्रीय कर्मियों के साथ दिल्ली में रैली तथा 11 अप्रैल को केंद्रीय कर्मियों के साथ अनिश्चित कालीन हड़ताल में राज्य कर्मचारी भी शामिल होंगे। मुख़्य मांगे न्यूनतम वेतन 26000/ तथा पुरानी पेंशन की बहाली आदि है। अजय सिंह के हाथों में कमान सौंपे जाने से देश भर के राज्य कर्मियों में हर्ष व्याप्त है।
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Saturday, 20 February 2016
अजय सिंह बने अखिल भारतीय कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष।
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आंदोलन की पहचान, जुझारू नेता और प्रदेश के कर्मचारी की एक मात्र आस और उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह को वाराणसी सिगरा में हुये सम्मेलन में अध्य्क्ष चुना गया। 19 व् 20 फरवरी को पी एम मोदी के वाराणसी में कर्मचारियों ने हुंकार भरी। केरल, बिहार,तमिलनाडु, मणिपुर,पंजाब,आंध्र प्रदेश, हरियाणा,जम्मू कश्मीर,त्रिपुरा के प्रतिनिधियों के बीच इस सम्मेलन में पारित प्रस्ताव के अनुसार 11 मार्च को केंद्रीय कर्मियों के साथ दिल्ली में रैली तथा 11 अप्रैल को केंद्रीय कर्मियों के साथ अनिश्चित कालीन हड़ताल में राज्य कर्मचारी भी शामिल होंगे। मुख़्य मांगे न्यूनतम वेतन 26000/ तथा पुरानी पेंशन की बहाली आदि है। अजय सिंह के हाथों में कमान सौंपे जाने से देश भर के राज्य कर्मियों में हर्ष व्याप्त है।Tuesday, 16 February 2016
विधानसभा उपचुनाव के नतीजे सपा के लिए शुभ संकेत नहीं।

उत्तर प्रदेश की तीन विधान सभा बीकापुर, देवबंद और मुज़फ्फरनगर के उपचुनाव के नतीजे सपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। मिशन 2017 की तैयारी को करारा झटका है। बीकापुर में मित्रसेन की सहानभूति की लहर और पूरी ताकत झोंकने के बावजूद जिस तरह सपा को जीत मिली वो प्रसन्न होने की नहीं बल्कि चिंतन करने का संकेत है।देवबंद और मुज़फ्फरनगर में हराकर कांग्रेस और भाजपा ने सपा की नींद उड़ा दी है। आमतौर से उपचुनाव सत्ताधारी दल के पक्ष में जाते हैं। पर जब आज ये हाल है तो 2017 के आम चुनाव में जनता का आक्रोश नई कहानी लिखेगा । अब देखना ये है कि अब से इन नतीजों से सबक़ लेकर कर्मचारी-शिक्षक किसान-अल्पसंख्यक और आम जन के लिए सरकार कुछ करेगी। या फिर कुछ ख़ास लोगों की ही सरकार बन कर रहेगी। नतीजों के असर से जनता का कुछ भला हो जाय।देखिये क्या होता है।

Wednesday, 10 February 2016
जौनपुर के दोहरे की प्लास्टिक थैली पर प्रतिबन्ध नहीं ?
जौनपुर। जहाँ एक तरफ प्रदेश सरकार द्वारा प्लास्टिक के इस्तेमाल पर बैन के बाद से शासन-प्रशासन हरकत में है।जिसका असर दिखने लगा है। सब्ज़ी, फल, किराना और जनरल स्टोर के दुकानदारों ने प्लास्टिक थैली रखना छोड़ दिया है और अख़बार के डोंगे और कपडे के झोले रखना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं लोगों ने भी घर से बाहर निकलने के पहले घर से झोला, थैला लेकर चलना भी शुरू कर दिया है।पर दोहरे की प्लास्टिक थैली पर मानो प्रतिबन्ध ही न हो। आज भी धड़ल्ले से मोटी प्लास्टिक की थैली में भर कर बिना किसी ख़ौफ़ के खुलेआम इसकी बिक्री हो रही है। ये कैसा क़ानून की रोज़मर्रा के इस्तेमाल के सामान की प्लास्टिक थैली पर रोक और मीठे ज़हर दोहरे की प्लास्टिक थैली पर रोक का असर नहीं। एक ऐसा धंधा जिसका न कोई मानक न रजिस्ट्रेशन न टैक्स फिर भी ये गोरखधंधा जारी है। और अब प्लास्टिक थैली बे ख़ौफ़ इस्तेमाल को क्या कहा जाय।
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